Shri Surya Aarti
Aarti
Surya
Devotion
Sanskrit Text
॥ श्री सूर्य आरती ॥
ॐ जय सूर्य भगवान, ॐ जय सूर्य भगवान।
निशदिन तुमको ध्यावत, हर-विष्णु विधान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सप्त अश्व रथ राजत, तुम जग के प्राण।
तुम्हीं को सब देवता, सुमिरत करत बखान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
प्रगट भये ये अदिति के, गर्भ मझार।
कश्यप ऋषि के नन्दन, तिमिर विदार॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
अर्घ्य जो तुमको चढ़ावे, प्रातः उठ जाय।
मनवांछित फल पावे, दुख दारिद्र नशाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
संध्या छठ के दिन जो, करे तुम्हारी सेव।
सभी मनोरथ पूरण हो, पावे वर देव॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
रविवार व्रत जो करे, कथा सुने मन लाय।
पाप कटे सब जन्म के, लहे मुक्ति पाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
उदय होत प्रातः तुम, तिमिर हरत तत्काल।
सृष्टि जागृत हो तब, तुम हो किरण निराल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ताप रोग औ' कुष्ठ जो, दूर करत तत्काल।
नेत्र ज्योति बढ़ाइये, हरो सब जंजाल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सूर्य नारायण भगवान, आदित्य महान।
अरुण सारथी कल्पित, करो भक्त कल्याण॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
॥ इति श्री सूर्य आरती सम्पूर्णम् ॥
Transliteration
|| Shri Surya Aarti ||
Om jai Surya Bhagwan, Om jai Surya Bhagwan.
Nishdin tumko dhyavat, Har-Vishnu vidhan.
Om jai Surya Bhagwan.
Sapt ashva rath rajat, tum jag ke pran.
Tumhi ko sab devata, sumirat karat bakhan.
Om jai Surya Bhagwan.
Pragat bhaye ye Aditi ke, garbh majhar.
Kashyap rishi ke nandan, timir vidar.
Om jai Surya Bhagwan.
Arghya jo tumko chadhave, pratah uth jaay.
Manvanchit phal pave, dukh daridra nashaay.
Om jai Surya Bhagwan.
Sandhya Chhath ke din jo, kare tumhari sev.
Sabhi manorath puran ho, pave var dev.
Om jai Surya Bhagwan.
Ravivaar vrat jo kare, katha sune man laay.
Paap kate sab janm ke, lahe mukti paay.
Om jai Surya Bhagwan.
Udaya hot pratah tum, timir harat tatkal.
Srishti jagrit ho tab, tum ho kiran niral.
Om jai Surya Bhagwan.
Taap rog au kusht jo, door karat tatkal.
Netra jyoti badhaaiye, haro sab janjaal.
Om jai Surya Bhagwan.
Surya Narayan Bhagwan, Aditya mahan.
Arun sarathi kalpit, karo bhakt kalyan.
Om jai Surya Bhagwan.
|| Iti Shri Surya Aarti Sampurnam ||
Translation
Glory to Lord Surya Bhagwan! Shiva and Vishnu meditate upon You day and night.
Seated gloriously on the chariot of seven horses, You are the life force of the universe. All deities remember You and sing Your praises.
You manifested from the womb of Mother Aditi. Son of Sage Kashyapa, You are the destroyer of darkness.
One who offers Arghya to You in the early morning obtains desired fruits and their sorrows and poverty are destroyed.
One who serves You during Sandhya and on Chhath festival has all wishes fulfilled and receives blessings from the gods.
One who observes Sunday fast and listens to Your stories with devotion has all sins of many lifetimes destroyed and attains liberation.
At Your dawn, darkness is immediately dispelled. Creation awakens, Your rays are incomparable.
You immediately remove fever, disease, and leprosy. Increase our eyesight and remove all troubles.
Surya Narayan Bhagwan, the great Aditya, with Aruna as Your charioteer, grant welfare to Your devotees.
Meaning
Shri Surya Aarti is a sacred hymn sung in praise of Lord Surya, the Sun God. Surya Dev is also known by names like Aditya, Bhaskara, Ravi, and Dinakara.
In Vedic tradition, Lord Surya holds a very important position. He is the visible deity whom we can see every day. The Rigveda contains numerous hymns praising the Sun.
Lord Surya is the son of Mother Aditi and Sage Kashyapa. His chariot is drawn by seven horses, symbolizing the seven days of the week. Aruna is His charioteer.
Worship of Surya brings relief from eye diseases, skin ailments, and many other afflictions. Observing Sunday fast and offering Arghya (water) to the Sun is highly meritorious.
Benefits
Benefits of Shri Surya Aarti:
1. Improved Eyesight - Vision and eye health improve
2. Disease Removal - Skin diseases and fevers are cured
3. Increased Vitality - Body gains radiance and energy
4. Poverty Removal - Hardships and poverty are eliminated
5. Planetary Peace - Afflictions of Sun planet are pacified
6. Good Health - Excellent health is obtained
7. Fame and Respect - Honor in society is received
8. Sin Destruction - All sins are destroyed
Method of Recitation:
- Recite at sunrise in the morning
- Recitation on Sunday is especially beneficial
- Always offer water (Arghya) to the Sun
Regular worship of Lord Surya brings vitality, health, and spiritual progress.
Sanskrit Text
॥ श्री सूर्य आरती ॥
ॐ जय सूर्य भगवान, ॐ जय सूर्य भगवान।
निशदिन तुमको ध्यावत, हर-विष्णु विधान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सप्त अश्व रथ राजत, तुम जग के प्राण।
तुम्हीं को सब देवता, सुमिरत करत बखान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
प्रगट भये ये अदिति के, गर्भ मझार।
कश्यप ऋषि के नन्दन, तिमिर विदार॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
अर्घ्य जो तुमको चढ़ावे, प्रातः उठ जाय।
मनवांछित फल पावे, दुख दारिद्र नशाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
संध्या छठ के दिन जो, करे तुम्हारी सेव।
सभी मनोरथ पूरण हो, पावे वर देव॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
रविवार व्रत जो करे, कथा सुने मन लाय।
पाप कटे सब जन्म के, लहे मुक्ति पाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
उदय होत प्रातः तुम, तिमिर हरत तत्काल।
सृष्टि जागृत हो तब, तुम हो किरण निराल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ताप रोग औ' कुष्ठ जो, दूर करत तत्काल।
नेत्र ज्योति बढ़ाइये, हरो सब जंजाल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सूर्य नारायण भगवान, आदित्य महान।
अरुण सारथी कल्पित, करो भक्त कल्याण॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
॥ इति श्री सूर्य आरती सम्पूर्णम् ॥
Translation
हे भगवान सूर्य देव! आपकी जय हो। शिव और विष्णु रात-दिन आपका ध्यान करते हैं।
सात घोड़ों वाले रथ पर सुशोभित आप जगत के प्राण हैं। सभी देवता आपका स्मरण करते हैं और आपका गुणगान करते हैं।
आप माता अदिति के गर्भ से प्रकट हुए। कश्यप ऋषि के पुत्र, आप अंधकार का विनाश करने वाले हैं।
जो प्रातःकाल उठकर आपको अर्घ्य देता है, वह मनवांछित फल पाता है और उसके दुख-दारिद्र्य नष्ट हो जाते हैं।
जो संध्या और छठ के दिन आपकी सेवा करता है, उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और वह देवताओं से वर पाता है।
जो रविवार का व्रत करता है और मन लगाकर कथा सुनता है, उसके सभी जन्मों के पाप कट जाते हैं और वह मुक्ति पाता है।
प्रातःकाल आपका उदय होते ही अंधकार तुरंत दूर हो जाता है। तब सृष्टि जागृत हो जाती है, आप अनुपम किरणों वाले हैं।
ताप, रोग और कुष्ठ को आप तुरंत दूर करते हैं। नेत्र ज्योति बढ़ाइए और सभी जंजालों को हरिए।
सूर्य नारायण भगवान, आदित्य महान, अरुण आपके सारथी हैं। भक्तों का कल्याण करें।
Meaning
श्री सूर्य आरती भगवान सूर्य देव की स्तुति में गाई जाने वाली पवित्र आरती है। सूर्य देव को आदित्य, भास्कर, रवि, और दिनकर आदि नामों से भी जाना जाता है।
वैदिक परंपरा में सूर्य देव का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वे प्रत्यक्ष देवता हैं जिन्हें हम प्रतिदिन देख सकते हैं। ऋग्वेद में सूर्य की स्तुति के अनेक मंत्र हैं।
सूर्य देव माता अदिति और ऋषि कश्यप के पुत्र हैं। उनके रथ में सात घोड़े जुते हैं जो सात दिनों का प्रतीक हैं। अरुण उनके सारथी हैं।
सूर्य की उपासना से नेत्र रोग, चर्म रोग, और अनेक व्याधियों से मुक्ति मिलती है। रविवार का व्रत और सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत पुण्यकारी है।
Benefits
श्री सूर्य आरती के लाभ:
१. नेत्र ज्योति वृद्धि - आंखों की रोशनी बढ़ती है
२. रोग निवारण - त्वचा रोग, ताप आदि दूर होते हैं
३. तेज वृद्धि - शरीर में ओज और तेज बढ़ता है
४. दारिद्र्य नाश - गरीबी और दुख दूर होते हैं
५. ग्रह शांति - सूर्य ग्रह की पीड़ा शांत होती है
६. आरोग्य प्राप्ति - उत्तम स्वास्थ्य मिलता है
७. यश प्राप्ति - समाज में मान-सम्मान मिलता है
८. पाप क्षय - सभी पाप नष्ट होते हैं
पाठ विधि:
- प्रातःकाल सूर्योदय के समय पाठ करें
- रविवार को पाठ विशेष फलदायी है
- सूर्य को जल का अर्घ्य अवश्य दें
Sanskrit Text
॥ श्री सूर्य आरती ॥
ॐ जय सूर्य भगवान, ॐ जय सूर्य भगवान।
निशदिन तुमको ध्यावत, हर-विष्णु विधान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सप्त अश्व रथ राजत, तुम जग के प्राण।
तुम्हीं को सब देवता, सुमिरत करत बखान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
प्रगट भये ये अदिति के, गर्भ मझार।
कश्यप ऋषि के नन्दन, तिमिर विदार॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
अर्घ्य जो तुमको चढ़ावे, प्रातः उठ जाय।
मनवांछित फल पावे, दुख दारिद्र नशाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
संध्या छठ के दिन जो, करे तुम्हारी सेव।
सभी मनोरथ पूरण हो, पावे वर देव॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
रविवार व्रत जो करे, कथा सुने मन लाय।
पाप कटे सब जन्म के, लहे मुक्ति पाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
उदय होत प्रातः तुम, तिमिर हरत तत्काल।
सृष्टि जागृत हो तब, तुम हो किरण निराल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ताप रोग औ' कुष्ठ जो, दूर करत तत्काल।
नेत्र ज्योति बढ़ाइये, हरो सब जंजाल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सूर्य नारायण भगवान, आदित्य महान।
अरुण सारथी कल्पित, करो भक्त कल्याण॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
॥ इति श्री सूर्य आरती सम्पूर्णम् ॥
Translation
एषा आरती भगवतः सूर्यस्य स्तुतिः। सूर्यः आदित्यः भास्करः रविः दिनकरः इति नामभिः ज्ञायते। वैदिकपरम्परायां सूर्यस्य महत्त्वपूर्णं स्थानम्। सूर्यः प्रत्यक्षदेवता। ऋग्वेदे सूर्यस्तुतेः अनेके मन्त्राः सन्ति।
सूर्यः अदितेः कश्यपस्य च पुत्रः। तस्य रथे सप्ताश्वाः। अरुणः तस्य सारथिः। सूर्योपासनया नेत्ररोगात् चर्मरोगात् अनेकव्याधिभ्यश्च मुक्तिः।
Meaning
सूर्यः जगतः प्राणः। सर्वे देवाः सूर्यं स्मरन्ति। सूर्योदये तिमिरः नश्यति सृष्टिः जागृता भवति। सूर्यः रोगनाशकः पापनाशकः च।
Benefits
नेत्रज्योतिवृद्धिः। रोगनिवारणम्। तेजोवृद्धिः। दारिद्र्यनाशः। ग्रहशान्तिः। आरोग्यप्राप्तिः। यशःप्राप्तिः। पापक्षयः।
Sanskrit Text
॥ श्री सूर्य आरती ॥
ॐ जय सूर्य भगवान, ॐ जय सूर्य भगवान।
निशदिन तुमको ध्यावत, हर-विष्णु विधान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सप्त अश्व रथ राजत, तुम जग के प्राण।
तुम्हीं को सब देवता, सुमिरत करत बखान॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
प्रगट भये ये अदिति के, गर्भ मझार।
कश्यप ऋषि के नन्दन, तिमिर विदार॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
अर्घ्य जो तुमको चढ़ावे, प्रातः उठ जाय।
मनवांछित फल पावे, दुख दारिद्र नशाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
संध्या छठ के दिन जो, करे तुम्हारी सेव।
सभी मनोरथ पूरण हो, पावे वर देव॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
रविवार व्रत जो करे, कथा सुने मन लाय।
पाप कटे सब जन्म के, लहे मुक्ति पाय॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
उदय होत प्रातः तुम, तिमिर हरत तत्काल।
सृष्टि जागृत हो तब, तुम हो किरण निराल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
ताप रोग औ' कुष्ठ जो, दूर करत तत्काल।
नेत्र ज्योति बढ़ाइये, हरो सब जंजाल॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
सूर्य नारायण भगवान, आदित्य महान।
अरुण सारथी कल्पित, करो भक्त कल्याण॥
ॐ जय सूर्य भगवान॥
॥ इति श्री सूर्य आरती सम्पूर्णम् ॥
Translation
சூர்ய பகவானுக்கு வெற்றி! சிவனும் விஷ்ணுவும் இரவும் பகலும் உம்மை தியானிக்கிறார்கள்.
ஏழு குதிரைகள் பூட்டிய தேரில் வீற்றிருக்கும் நீர் உலகின் உயிர்மூச்சு. அனைத்து தேவர்களும் உம்மை நினைவு கூர்ந்து புகழ்கிறார்கள்.
நீர் அதிதி மாதாவின் கருவிலிருந்து தோன்றினீர். காசியப முனிவரின் புதல்வர், இருளை அழிப்பவர்.
காலையில் எழுந்து உமக்கு அர்க்கியம் தருபவர் விரும்பிய பலன்களைப் பெறுவார், துக்கமும் வறுமையும் அழியும்.
சந்தியா நேரத்திலும் சத் பண்டிகையிலும் உமக்கு சேவை செய்பவரின் அனைத்து விருப்பங்களும் நிறைவேறும்.
ஞாயிற்றுக்கிழமை விரதம் இருந்து கதை கேட்பவரின் அனைத்து பிறவிப் பாவங்களும் அழிந்து முக்தி கிடைக்கும்.
உதயமாகும்போது இருள் உடனே விலகுகிறது. படைப்பு விழிக்கிறது, உமது கிரணங்கள் ஒப்பற்றவை.
Meaning
ஸ்ரீ சூர்ய ஆரத்தி சூர்ய பகவானின் புகழில் பாடப்படும் புனித பாடல். சூர்ய தேவர் ஆதித்யன், பாஸ்கரன், ரவி, தினகரன் என்ற பெயர்களாலும் அறியப்படுகிறார்.
வேத மரபில் சூர்ய தேவருக்கு மிக முக்கியமான இடம் உள்ளது. அவர் நேரடியாகக் காணக்கூடிய தெய்வம். ரிக் வேதத்தில் சூர்யனைப் புகழும் பல மந்திரங்கள் உள்ளன.
சூர்யன் அதிதி மாதாவின் மற்றும் காசியப முனிவரின் மகன். அவரது தேரை ஏழு குதிரைகள் இழுக்கின்றன. அருணன் அவரது தேரோட்டி.
Benefits
1. கண் பார்வை மேம்படும்
2. தோல் நோய்கள், காய்ச்சல் குணமாகும்
3. உடலில் ஒளியும் சக்தியும் அதிகரிக்கும்
4. வறுமையும் துன்பங்களும் நீங்கும்
5. சூர்ய கிரக தோஷம் சாந்தியாகும்
6. நல்ல ஆரோக்கியம் கிடைக்கும்
7. புகழும் மரியாதையும் கிடைக்கும்
8. அனைத்து பாவங்களும் அழியும்
ஞாயிற்றுக்கிழமை சூரிய உதயத்தின் போது படிப்பது சிறப்பானது.
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